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mahabharat 7.113.30-32h: ‘माधव! तुम्हारे गुरु अर्जुन कायरों की भाँति युद्धभूमि छोड़कर चले गए हैं। जब मैं युद्ध कर रहा था, तब भी वे मुझे छोड़कर मेरी परिक्रमा करने लगे। यदि तुम भी अपने गुरु की भाँति मुझे युद्धभूमि में नहीं छोड़ोगे, तो आज युद्ध के लिए तैयार होकर भी मेरे हाथों से जीवित नहीं बच सकोगे।’॥30-31 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना  »  श्लोक 30-32h
 
 
श्लोक  7.113.30-32h 
तवाचार्यो रणं हित्वा गत: कापुरुषो यथा॥ ३०॥
युध्यमानं च मां हित्वा प्रदक्षिणमवर्तत।
त्वं हि मे युध्यतो नाद्य जीवन् यास्यसि माधव॥ ३१॥
यदि मां त्वं रणे हित्वा न यास्याचार्यवद् द्रुतम्।
 
 
अनुवाद
‘माधव! तुम्हारे गुरु अर्जुन कायरों की भाँति युद्धभूमि छोड़कर चले गए हैं। जब मैं युद्ध कर रहा था, तब भी वे मुझे छोड़कर मेरी परिक्रमा करने लगे। यदि तुम भी अपने गुरु की भाँति मुझे युद्धभूमि में नहीं छोड़ोगे, तो आज युद्ध के लिए तैयार होकर भी मेरे हाथों से जीवित नहीं बच सकोगे।’॥30-31 1/2॥
 
‘Madhava! Your teacher Arjuna has left the battlefield like a coward. Even when I was fighting, he left me and went circling me. If you too do not leave me in the battlefield like your teacher, you will not be able to escape alive from my hands today while being ready for battle.’॥ 30-31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)