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mahabharat 7.113.29-30h: इसी प्रकार सात्यकि ने भी बिना किसी प्रकार के भय के द्रोणाचार्य को बहुत से तीव्रगामी बाणों की वर्षा से आच्छादित कर दिया। तब द्रोणाचार्य बोले -॥29 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  7.113.29-30h 
तथैव युयुधानोऽपि द्रोणं बहुभिराशुगै:॥ २९॥
आच्छादयदसम्भ्रान्तस्ततो द्रोण उवाच ह।
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार सात्यकि ने भी बिना किसी प्रकार के भय के द्रोणाचार्य को बहुत से तीव्रगामी बाणों की वर्षा से आच्छादित कर दिया। तब द्रोणाचार्य बोले -॥29 1/2॥
 
Similarly, Satyaki also without any panic covered Dronacharya with a shower of many fast moving arrows. Then Dronacharya said -॥ 29 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)