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mahabharat 7.113.24: राजन! तब सात्यकि ने भी युद्धस्थल में अपने सिंहासन पर आरूढ़ होकर, तीक्ष्ण स्वर्ण पंख वाले तथा मुर्गे और मयूर के पंखों से संयुक्त सात बाणों द्वारा द्रोणाचार्य को क्षत-विक्षत कर दिया॥24॥   |   mahabharat अध्याय 7.113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.113.24 
सात्यकिस्तु रणे द्रोणं राजन् विव्याध सप्तभि:।
हेमपुङ्खै: शिलाधौतै: कङ्कबर्हिणवाजितै:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
राजन! तब सात्यकि ने भी युद्धस्थल में अपने सिंहासन पर आरूढ़ होकर, तीक्ष्ण स्वर्ण पंख वाले तथा मुर्गे और मयूर के पंखों से संयुक्त सात बाणों द्वारा द्रोणाचार्य को क्षत-विक्षत कर दिया॥24॥
 
Rajan! Then Satyaki also mounted on his throne in the battle arena, with seven arrows having sharp golden wings and combined with the feathers of cockerel and peacock, mutilated Dronacharya. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)