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mahabharat 7.113.22: सत्यकानन्दन युयुधान अत्यन्त क्रोध में भरकर द्रोणाचार्य के पास पहुँचकर रुक गया; परन्तु वापस नहीं लौटा। जैसे व्याकुल जलाशय अपने किनारे पहुँचकर फिर कभी नहीं लौटता ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 7.113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.113.22 
भारद्वाजं समासाद्य युयुधानश्च सात्यकि:।
न न्यवर्तत संक्रुद्धो वेलामिव जलाशय:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
सत्यकानन्दन युयुधान अत्यन्त क्रोध में भरकर द्रोणाचार्य के पास पहुँचकर रुक गया; परन्तु वापस नहीं लौटा। जैसे व्याकुल जलाशय अपने किनारे पहुँचकर फिर कभी नहीं लौटता ॥22॥
 
Satyakanandan Yuyudhan, filled with extreme anger, stopped after reaching Dronacharya; But did not return. Just as a troubled water body reaches its banks and never returns back. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)