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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.113.21 
ततस्तेनैव मार्गेण येन यातो धनंजय:।
इयेष सात्यकिर्गन्तुं ततो द्रोणेन वारित:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सात्यकि ने भी उसी मार्ग से जाने का निश्चय किया जिस मार्ग से अर्जुन गया था; किन्तु द्रोणाचार्य ने उसे रोक दिया।
 
Thereafter Satyaki also decided to go by the same route by which Arjuna had gone; but Dronacharya stopped him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)