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mahabharat 7.113.16-17h: वहाँ की भूमि अत्यंत सुन्दर लग रही थी, क्योंकि उन गिरे हुए योद्धाओं के नेत्र बैल के समान बड़े थे, उनके मुख सुन्दर कुण्डलों से सुशोभित थे और चन्द्रमा के समान शोभा पा रहे थे ॥16 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 113: सात्यकिका द्रोण और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए काम्बोजोंकी सेनाके पास पहुँचना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  7.113.16-17h 
शशाङ्कसंनिभैश्चैव वदनैश्चारुकुण्डलै:॥ १६॥
पतितैर्ऋषभाक्षाणां सा बभावति मेदिनी।
 
 
अनुवाद
वहाँ की भूमि अत्यंत सुन्दर लग रही थी, क्योंकि उन गिरे हुए योद्धाओं के नेत्र बैल के समान बड़े थे, उनके मुख सुन्दर कुण्डलों से सुशोभित थे और चन्द्रमा के समान शोभा पा रहे थे ॥16 1/2॥
 
The ground there looked extremely beautiful with the fallen warriors having large eyes like those of a bull and their faces adorned with beautiful earrings and like the moon. ॥ 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)