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mahabharat 7.112.78-79h: हे मनुष्यों के स्वामी! सात्यकि को अपने अन्तरात्मा में प्रवेश करने के लिए आतुर देखकर आपकी सेना पुनः मोहित हो गई और बारम्बार काँपने लगी।   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 78-79h
 
 
श्लोक  7.112.78-79h 
तं दृष्ट्वा प्रविविक्षन्तं सैन्यं तव जनाधिप॥ ७८॥
भूय एवाभवन्मूढं सुभृशं चाप्यकम्पत।
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! सात्यकि को अपने अन्तरात्मा में प्रवेश करने के लिए आतुर देखकर आपकी सेना पुनः मोहित हो गई और बारम्बार काँपने लगी।
 
O Lord of men! Seeing Satyaki eager to enter your inner self, your army was once again overcome with fascination and began to tremble repeatedly. 78 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)