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mahabharat 7.112.75-77h: भीमसेन! तुम मेरे गुणों पर मोहित हो गए हो, इसलिए तुम मेरे वश में आ गए हो और इस समय जो शुभ शकुन दिख रहे हैं, वे मुझे बता रहे हैं कि महाबली अर्जुन द्वारा पापी जयद्रथ के मारे जाने पर मैं अवश्य लौटकर धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर का आलिंगन करूँगा। ॥75-76 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 75-77h
 
 
श्लोक  7.112.75-77h 
यन्मे गुणानुरक्तश्च त्वमद्य वशमास्थित:॥ ७५॥
निमित्तानि च धन्यानि यथा भीम वदन्ति माम्।
निहते सैन्धवे पापे पाण्डवेन महात्मना॥ ७६॥
परिष्वजिष्ये राजानं धर्मात्मानं युधिष्ठिरम्।
 
 
अनुवाद
भीमसेन! तुम मेरे गुणों पर मोहित हो गए हो, इसलिए तुम मेरे वश में आ गए हो और इस समय जो शुभ शकुन दिख रहे हैं, वे मुझे बता रहे हैं कि महाबली अर्जुन द्वारा पापी जयद्रथ के मारे जाने पर मैं अवश्य लौटकर धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर का आलिंगन करूँगा। ॥75-76 1/2॥
 
Bhimasena! You have come under my control because you have been enamoured by my qualities and the auspicious omens that are appearing at this time are telling me that after the sinner Jayadratha is killed by the great Arjuna, I shall certainly return and embrace the righteous King Yudhishthira.' ॥ 75-76 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)