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mahabharat 7.112.74-75h: भीमसेन के ऐसा कहने पर सात्यकि ने उनसे कहा - 'कुंतीकुमार! तुम जाओ। तुम्हें अवश्य लौटना होगा। मेरी अवश्य विजय होगी।'   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 74-75h
 
 
श्लोक  7.112.74-75h 
एवमुक्त: प्रत्युवाच भीमसेनं स माधव:॥ ७४॥
गच्छ गच्छ ध्रुवं पार्थ ध्रुवो हि विजयो मम।
 
 
अनुवाद
भीमसेन के ऐसा कहने पर सात्यकि ने उनसे कहा - 'कुंतीकुमार! तुम जाओ। तुम्हें अवश्य लौटना होगा। मेरी अवश्य विजय होगी।'
 
When Bhimasena said this, Satyaki said to him - 'Kuntikumar! You go. You must definitely return. I will definitely be victorious. 74 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)