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mahabharat 7.112.70: उस समय कवच आदि से सुसज्जित भीमसेन को पीछे आते देख वीर सात्यकि ने उन्हें नमस्कार किया और उनसे ये हर्षपूर्ण वचन कहे-॥70॥   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  7.112.70 
संनद्धमनुगच्छन्तं दृष्ट्वा भीमं स सात्यकि:।
अभिनन्द्याब्रवीद् वीरस्तदा हर्षकरं वच:॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
उस समय कवच आदि से सुसज्जित भीमसेन को पीछे आते देख वीर सात्यकि ने उन्हें नमस्कार किया और उनसे ये हर्षपूर्ण वचन कहे-॥70॥
 
At that time, seeing Bhimasena coming behind him decked in armour etc., the brave Satyaki greeted him and said these joyful words to him -॥ 70॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)