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mahabharat 7.112.67: तत्पश्चात् वे वायु के समान वेगवान और अजेय बलवान घोड़े मतवाले होकर उस विजयी रथ के साथ सिन्धु देश से चल पड़े ॥67॥   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  7.112.67 
ततस्ते वाजिनो हृष्टा: सुपुष्टा: वातरंहस:।
अजय्या जैत्रमूहुस्तं विकुर्वाणा: स्म सैन्धवा:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे वायु के समान वेगवान और अजेय बलवान घोड़े मतवाले होकर उस विजयी रथ के साथ सिन्धु देश से चल पड़े ॥67॥
 
Thereafter, those sturdy and strong horses, as swift as the wind and invincible, from the country of Sindhu, intoxicated, set off with that victorious chariot. ॥ 67॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)