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mahabharat 7.112.51-52h: राजन! इनके अतिरिक्त और भी बहुत से प्रकार के रण-कठोर योद्धा हैं, जो काल के समान भयंकर और अजेय हैं, मैं युद्धस्थल में उन सबका सामना करूँगा। 51 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  7.112.51-52h 
तथान्यैर्विविधैर्योधै: कालकल्पैर्दुरासदै:॥ ५१॥
समेष्यामि रणे राजन् बहुभिर्युद्धदुर्मदै:।
 
 
अनुवाद
राजन! इनके अतिरिक्त और भी बहुत से प्रकार के रण-कठोर योद्धा हैं, जो काल के समान भयंकर और अजेय हैं, मैं युद्धस्थल में उन सबका सामना करूँगा। 51 1/2॥
 
King! Apart from these, there are many other types of battle-hardened warriors as fierce and invincible as time, I will face them all in the battlefield. 51 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)