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mahabharat 7.112.47-48h: इस युद्ध में गुरुजनों द्वारा बताई गई रीति से विविध प्रकार के अस्त्र-शस्त्र एकत्रित करने चाहिए। रथ पर रखी जाने वाली युद्ध सामग्री पहले से पाँच गुनी बढ़ा देनी चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  7.112.47-48h 
अस्मिंस्तु किल सम्मर्दे ग्राह्यं विविधमायुधम्॥ ४७॥
यथोपदिष्टमाचार्यै: कार्य: पञ्चगुणो रथ:।
 
 
अनुवाद
इस युद्ध में गुरुजनों द्वारा बताई गई रीति से विविध प्रकार के अस्त्र-शस्त्र एकत्रित करने चाहिए। रथ पर रखी जाने वाली युद्ध सामग्री पहले से पाँच गुनी बढ़ा देनी चाहिए।
 
‘In this war, various types of weapons should be collected in the manner prescribed by the teachers. The war material to be placed on the chariot should be increased five times than before. 47 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)