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mahabharat 7.112.46-47h: किन्तु जैसे अग्नि तिनकों को जला देती है, वैसे ही मैं उन समस्त कौरव सैनिकों का मंथन करूँगा। अतः हे राजन! रथ को सजाने वाले लोग आज ही मेरे रथ पर सोने से भरे हुए तरकश तथा अन्य आवश्यक उपकरण स्थापित करें।'   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  7.112.46-47h 
तानहं प्रमथिष्यामि तृणानीव हुताशन:।
तस्मात् सर्वानुपासंगान् सर्वोपकरणानि च॥ ४६॥
रथे कुर्वन्तु मे राजन् यथावद् रथकल्पका:।
 
 
अनुवाद
किन्तु जैसे अग्नि तिनकों को जला देती है, वैसे ही मैं उन समस्त कौरव सैनिकों का मंथन करूँगा। अतः हे राजन! रथ को सजाने वाले लोग आज ही मेरे रथ पर सोने से भरे हुए तरकश तथा अन्य आवश्यक उपकरण स्थापित करें।'
 
‘But just as fire burns straws, in the same way I will churn all those Kaurava soldiers. Therefore, O King! The people who decorate the chariot should place the quivers filled with gold and all other necessary equipment on my chariot today. 46 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)