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mahabharat 7.112.44-45: भरतनन्दन! दुर्योधन की ये अनेक अक्षौहिणी सेनाएँ क्रोध में भरी हुई कौरव योद्धाओं द्वारा सुरक्षित होकर मेरे लिए तैयार खड़ी हैं। महाराज! ये सभी मुझ पर सावधानी से आक्रमण करने जा रही हैं।॥44-45॥   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 44-45
 
 
श्लोक  7.112.44-45 
अक्षौहिण्यश्च संरब्धा धार्तराष्ट्रस्य भारत॥ ४४॥
यत्ता मदर्थे तिष्ठन्ति कुरुवीराभिरक्षिता:।
अप्रमत्ता महाराज मामेव प्रत्युपस्थिता:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! दुर्योधन की ये अनेक अक्षौहिणी सेनाएँ क्रोध में भरी हुई कौरव योद्धाओं द्वारा सुरक्षित होकर मेरे लिए तैयार खड़ी हैं। महाराज! ये सभी मुझ पर सावधानी से आक्रमण करने जा रही हैं।॥44-45॥
 
‘Bharatanandan! These many Akshauhini armies of Duryodhan filled with anger are standing ready for me, protected by the Kaurava warriors. Maharaj! All of them are going to attack me with caution. ॥ 44-45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)