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mahabharat 7.112.43-44h: वे वीर, विद्वान और धनुर्वेद में पारंगत हैं। उनका एक बड़ा संगठन है। वे एक-दूसरे का कल्याण चाहते हैं।॥43 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  7.112.43-44h 
शूराश्च कृतविद्याश्च धनुर्वेदे च निष्ठिता:॥ ४३॥
संहताश्च भृशं ह्येते अन्योन्यस्य हितैषिण:।
 
 
अनुवाद
वे वीर, विद्वान और धनुर्वेद में पारंगत हैं। उनका एक बड़ा संगठन है। वे एक-दूसरे का कल्याण चाहते हैं।॥43 1/2॥
 
‘They are brave, learned and versed in Dhanur Veda. There is a big organization among them. They wish well for each other.॥ 43 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)