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mahabharat 7.112.41-42h: दूसरों के बल पर जीने वाले दुर्योधन ने इन सब लोगों का सदैव आदरपूर्वक साथ दिया है; किन्तु आज मेरे बाणों की वर्षा से ये सब नष्ट हो जायेंगे।   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  7.112.41-42h 
तेन सम्भाविता नित्यं परवीर्योपजीविना॥ ४१॥
विनाशमुपयास्यन्ति मच्छरौघनिपीडिता:।
 
 
अनुवाद
दूसरों के बल पर जीने वाले दुर्योधन ने इन सब लोगों का सदैव आदरपूर्वक साथ दिया है; किन्तु आज मेरे बाणों की वर्षा से ये सब नष्ट हो जायेंगे।
 
Duryodhana, who lives on the strength of others, has always supported all these people with respect; but today they will be destroyed by the shower of my arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)