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mahabharat 7.112.40-41h: कुन्तीनन्दन! वे सभी आज मेरे बाणों के निशाने पर हैं। वे मन के समान तीव्र होने पर भी मेरे हाथों से बच नहीं सकेंगे।'   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  7.112.40-41h 
ते तु सर्वेऽद्य सम्प्राप्ता मम नाराचगोचरम्॥ ४०॥
न विमोक्ष्यन्ति कौन्तेय यद्यपि स्युर्मनोजवा:।
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! वे सभी आज मेरे बाणों के निशाने पर हैं। वे मन के समान तीव्र होने पर भी मेरे हाथों से बच नहीं सकेंगे।'
 
‘Kuntinandan! All of them are the targets of my arrows today. Even if they are as fast as the mind, they will not be able to escape from my hands. 40 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)