Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.112.33-35: ये विशाल हाथी, जिन्हें आप देख रहे हैं, अंजन नामक दैत्य के कुल में उत्पन्न हुए हैं। इनका स्वभाव बड़ा कठोर है। इन्हें युद्धकला का अच्छा प्रशिक्षण प्राप्त है। इनके मस्तक और मुख से मद की धारा बहती रहती है। ये सभी स्वर्ण कवच से सुशोभित हैं। हे राजन! ये युद्धभूमि में अपने लक्ष्य पर विजय प्राप्त कर चुके हैं और युद्धभूमि में ऐरावत के समान पराक्रम प्रदर्शित करते हैं। इन हाथियों पर उत्तर पर्वतों (हिमालय क्षेत्र) से आए तीक्ष्ण स्वभाव वाले डाकू और डाकू सवार हैं। | mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये विशाल हाथी, जिन्हें आप देख रहे हैं, अंजन नामक दैत्य के कुल में उत्पन्न हुए हैं। इनका स्वभाव बड़ा कठोर है। इन्हें युद्धकला का अच्छा प्रशिक्षण प्राप्त है। इनके मस्तक और मुख से मद की धारा बहती रहती है। ये सभी स्वर्ण कवच से सुशोभित हैं। हे राजन! ये युद्धभूमि में अपने लक्ष्य पर विजय प्राप्त कर चुके हैं और युद्धभूमि में ऐरावत के समान पराक्रम प्रदर्शित करते हैं। इन हाथियों पर उत्तर पर्वतों (हिमालय क्षेत्र) से आए तीक्ष्ण स्वभाव वाले डाकू और डाकू सवार हैं।
‘These huge elephants that you can see were born in the family of a giant named Anjan. Their nature is very harsh. They have received good training in warfare. A stream of intoxication keeps flowing from their foreheads and mouths. All of them are adorned with golden armour. O King! They have already conquered their targets in the battlefield and display valour like Airavat in the battle-field. Sharp-natured robbers and dacoits who have come from the northern mountains (Himalayan region) are riding on these elephants.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥