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mahabharat 7.112.32-33h: राजन! आज दुर्योधन के प्रभाव से वह मुझसे युद्ध करने को उद्यत है। इन युद्धोन्मादी किरातों को अपने बाणों से मारकर मैं सिंधुराज का वध करने के लिए प्रयत्नशील पाण्डुनंदन अर्जुन के पास जाऊँगा। 32 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  7.112.32-33h 
मदर्थमद्य संयत्ता दुर्योधनवशानुगा:।
एतान् हत्वा शरै राजन् किरातान् युद्धदुर्मदान्॥ ३२॥
सैन्धवस्य वधे यत्तमनुयास्यामि पाण्डवम्।
 
 
अनुवाद
राजन! आज दुर्योधन के प्रभाव से वह मुझसे युद्ध करने को उद्यत है। इन युद्धोन्मादी किरातों को अपने बाणों से मारकर मैं सिंधुराज का वध करने के लिए प्रयत्नशील पाण्डुनंदन अर्जुन के पास जाऊँगा। 32 1/2॥
 
King! Today, under the influence of Duryodhana, he is ready to fight with me. After killing these battle-mad Kiratas with my arrows, I will go to Pandu Nandan Arjun who is trying to kill Sindhuraj. 32 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)