Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.112.3: युद्ध में महाबली और नाना प्रकार से विचार करने वाले पुरुषरत्न सत्य ने धर्मराज से यह कहा-॥3॥   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.112.3 
निश्चित्य बहुधैवं स सात्यकिर्युद्धदुर्मद:।
धर्मराजमिदं वाक्यमब्रवीत् पुरुषर्षभ:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में महाबली और नाना प्रकार से विचार करने वाले पुरुषरत्न सत्य ने धर्मराज से यह कहा-॥3॥
 
Purusharatna Satya, who was formidable in battle and thought in various ways, said this to Dharamraj -॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)