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mahabharat 7.112.27-29h: महाराज! आप जो अन्य सात सौ हाथी देख रहे हैं, जो कवच से आच्छादित हैं और जिन पर किरात योद्धा सवार हैं, वे वही हाथी हैं जिन्हें किरात राजा ने दिग्विजय के समय सव्यसाची अर्जुन को उनकी जान बचाने के लिए उपहार में दिया था। ये सुसज्जित हाथी उस समय आपके सेवक थे।   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 27-29h
 
 
श्लोक  7.112.27-29h 
यांस्त्वेतानपरान् राजन् नागान् सप्त शतानिमान्॥ २७॥
प्रेक्षसे वर्मसंछन्नान् किरातै: समधिष्ठितान्।
किरातराजो यान् प्रादाद् द्विरदान् सव्यसाचिन:॥ २८॥
स्वलंकृतांस्तदा प्रेष्यानिच्छन् जीवितमात्मन:।
 
 
अनुवाद
महाराज! आप जो अन्य सात सौ हाथी देख रहे हैं, जो कवच से आच्छादित हैं और जिन पर किरात योद्धा सवार हैं, वे वही हाथी हैं जिन्हें किरात राजा ने दिग्विजय के समय सव्यसाची अर्जुन को उनकी जान बचाने के लिए उपहार में दिया था। ये सुसज्जित हाथी उस समय आपके सेवक थे।
 
‘Maharaj! The other seven hundred elephants that you are seeing, which are covered in armour and on which Kirata warriors are riding, are the same elephants that the Kirata king had gifted to Savyasachi Arjuna at the time of Digvijaya, in order to save his life. These decorated elephants were your servants in those days.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)