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mahabharat 7.112.25: राजन्! कर्ण की आज्ञा से ही वे अर्जुन के पास से लौट आए हैं। उनके कवच और धनुष अत्यंत सुदृढ़ हैं। वे न थके हैं, न पीड़ा में हैं॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.112.25 
तस्यैव वचनाद् राजन् निवृत्ता: श्वेतवाहनात्।
ते न क्लान्ता न च श्रान्ता दृढावरणकार्मुका:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
राजन्! कर्ण की आज्ञा से ही वे अर्जुन के पास से लौट आए हैं। उनके कवच और धनुष अत्यंत सुदृढ़ हैं। वे न थके हैं, न पीड़ा में हैं॥ 25॥
 
‘King! It is because of Karna's command that they have returned from Arjun's side. Their armour and bow are extremely strong. They are neither tired nor in pain.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)