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mahabharat 7.112.24: भगवान श्रीकृष्ण भी इन महारथियों की प्रशंसा करते हैं, ये सभी कर्ण के वश में हैं और सदैव उसे प्रसन्न करने की इच्छा रखते हैं ॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.112.24 
एतांस्तु वासुदेवोऽपि रथोदारान् प्रशंसति।
सततं प्रियकामाश्च कर्णस्यैते वशे स्थिता:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण भी इन महारथियों की प्रशंसा करते हैं, ये सभी कर्ण के वश में हैं और सदैव उसे प्रसन्न करने की इच्छा रखते हैं ॥ 24॥
 
Lord Krishna also praises these great warriors, all of them are under the control of Karna and always desire to please him. ॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)