Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.112.23: हे मनुष्यों के स्वामी! वह सदैव युद्धस्थल में मनुष्यों को परास्त करने की इच्छा रखता है। महाराज! कर्ण ने उसे दु:शासन का अनुयायी बना दिया है॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.112.23 
नित्यं हि समरे राजन् विजिगीषन्ति मानवान्।
कर्णेन विहिता राजन् दु:शासनमनुव्रता:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! वह सदैव युद्धस्थल में मनुष्यों को परास्त करने की इच्छा रखता है। महाराज! कर्ण ने उसे दु:शासन का अनुयायी बना दिया है॥ 23॥
 
O Lord of men! He always desires to defeat men in the battlefield. Maharaj! Karna has made him a follower of Dushasan.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)