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mahabharat 7.112.18-19h: राजन्! ये हाथी मेघों के समान दिखते हैं और वर्षा करने वाले मेघों के समान वर्षा करते हैं। हाथी सवारों द्वारा हाँके जाने पर भी ये युद्ध से पीछे नहीं हटते। महाराज! इन्हें मारने के अतिरिक्त किसी भी प्रकार से पराजित नहीं किया जा सकता।॥18 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  7.112.18-19h 
नागा मेघनिभा राजन् क्षरन्त इव तोयदा:।
नैते जातु निवर्तेरन् प्रेषिता हस्तिसादिभि:॥ १८॥
अन्यत्र हि वधादेषां नास्ति राजन् पराजय:।
 
 
अनुवाद
राजन्! ये हाथी मेघों के समान दिखते हैं और वर्षा करने वाले मेघों के समान वर्षा करते हैं। हाथी सवारों द्वारा हाँके जाने पर भी ये युद्ध से पीछे नहीं हटते। महाराज! इन्हें मारने के अतिरिक्त किसी भी प्रकार से पराजित नहीं किया जा सकता।॥18 1/2॥
 
‘King! These elephants look like clouds and rain like rain-bearing clouds. They never retreat from battle when driven by elephant riders. Maharaj! They cannot be defeated by any means other than killing.॥ 18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)