Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.112.1-2: संजय कहते हैं - हे राजन! धर्मराज की वह बात सुनकर शिनिप्रवर सात्यकि के मन में राजा को छोड़कर चले जाने के कारण अर्जुन के दुःखी होने का भय उत्पन्न हो गया। विशेषतः उन्हें लोक-अपमान का भय सताने लगा। वे सोचने लगे - मुझे अर्जुन की ओर आते देखकर सब लोग यही कहेंगे कि यह भय के मारे भाग गया है।॥1-2॥ | mahabharat अध्याय 7.112: सात्यकिकी अर्जुनके पास जानेकी तैयारी और सम्मानपूर्वक विदा होकर उनका प्रस्थान तथा साथ आते हुए भीमको युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये लौटा देना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संजय कहते हैं - हे राजन! धर्मराज की वह बात सुनकर शिनिप्रवर सात्यकि के मन में राजा को छोड़कर चले जाने के कारण अर्जुन के दुःखी होने का भय उत्पन्न हो गया। विशेषतः उन्हें लोक-अपमान का भय सताने लगा। वे सोचने लगे - मुझे अर्जुन की ओर आते देखकर सब लोग यही कहेंगे कि यह भय के मारे भाग गया है।॥1-2॥
Sanjaya says - O King! On hearing that statement of Dharmaraja, the fear of Arjuna being unhappy due to leaving the king arose in the mind of Shinipravar Satyaki. In particular, he began to fear public disgrace for himself. He began to think - seeing me coming towards Arjuna, everyone will say that he has run away in fear.॥ 1-2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥