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mahabharat 7.111.30-31: नरेश्वर! यदि देवता, दानव, मनुष्य, राक्षस, किन्नर और महासर्प तथा समस्त चर-अचर जीव-जंतु भी युद्ध के लिए तैयार हो जाएँ, तो भी वे सब मिलकर भी युद्धस्थल में अर्जुन का सामना नहीं कर सकते ॥30-31॥   |   mahabharat अध्याय 7.111: सात्यकि और युधिष्ठिरका संवाद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 111: सात्यकि और युधिष्ठिरका संवाद  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  7.111.30-31 
उद्युक्ता पृथिवी सर्वा ससुरासुरमानुषा॥ ३०॥
सराक्षसगणा राजन् सकिन्नरमहोरगा।
जङ्गमा: स्थावरा: सर्वे नालं पार्थस्य संयुगे॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! यदि देवता, दानव, मनुष्य, राक्षस, किन्नर और महासर्प तथा समस्त चर-अचर जीव-जंतु भी युद्ध के लिए तैयार हो जाएँ, तो भी वे सब मिलकर भी युद्धस्थल में अर्जुन का सामना नहीं कर सकते ॥30-31॥
 
Nareshwar! Even if the entire earth, including gods, demons, humans, demons, eunuchs and great snakes, and all living beings, both movable and immovable, get ready for war, they all together cannot face Arjuna in the battlefield. 30-31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)