Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.111.3: हे मर्यादा से कभी विचलित न होने वाले राजन! अर्जुन की सहायता के लिए आपने जो कुछ कहा है, वह सब मैंने सुना है। आपका कथन अद्भुत, न्यायपूर्ण और आपकी कीर्ति को बढ़ाने वाला है॥3॥ | mahabharat अध्याय 7.111: सात्यकि और युधिष्ठिरका संवाद । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रुतं ते गदतो वाक्यं सर्वमेतन्मयाच्युत।
न्याययुक्तं च चित्रं च फाल्गुनार्थे यशस्करम्॥ ३॥
अनुवाद
हे मर्यादा से कभी विचलित न होने वाले राजन! अर्जुन की सहायता के लिए आपने जो कुछ कहा है, वह सब मैंने सुना है। आपका कथन अद्भुत, न्यायपूर्ण और आपकी कीर्ति को बढ़ाने वाला है॥3॥
O King who never deviates from his dignity! I have heard all the things you have said to help Arjun. Your statement is wonderful, just and will increase your fame.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥