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mahabharat 7.111.28-30h: हे राजन! सिंधु और पुरु देश के योद्धा, उत्तर और दक्षिण के निवासी तथा अन्य महारथी तथा कर्ण आदि श्रेष्ठ रथी भी क्रुद्ध अर्जुन के सोलहवें अंश के बराबर भी नहीं हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.111: सात्यकि और युधिष्ठिरका संवाद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 111: सात्यकि और युधिष्ठिरका संवाद  »  श्लोक 28-30h
 
 
श्लोक  7.111.28-30h 
ये च सौवीरका योधास्तथा सैन्धवपौरवा:॥ २८॥
उदीच्या दाक्षिणात्याश्च ये चान्येऽपि महारथा:।
ये च कर्णमुखा राजन् रथोदारा: प्रकीर्तिता:॥ २९॥
एतेऽर्जुनस्य क्रुद्धस्य कलां नार्हन्ति षोडशीम्।
 
 
अनुवाद
हे राजन! सिंधु और पुरु देश के योद्धा, उत्तर और दक्षिण के निवासी तथा अन्य महारथी तथा कर्ण आदि श्रेष्ठ रथी भी क्रुद्ध अर्जुन के सोलहवें अंश के बराबर भी नहीं हैं।
 
O King! The Sauviras, the warriors from Sindhu and Puru country, the residents of the north and south and other great car-warriors, and the best car-warriors like Karna etc. are not even equal to one sixteenth of the enraged Arjuna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)