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mahabharat 7.111.23-24h: अर्जुन भी मुझे बुद्धिमान द्रोणाचार्य का सामना करने के लिए योग्य योद्धा मानते हैं। हे राजन! मैं न तो अपने गुरु की इस संभावना को, न उनकी आज्ञा को टाल सकता हूँ और न ही आपको त्याग सकता हूँ॥23 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.111: सात्यकि और युधिष्ठिरका संवाद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 111: सात्यकि और युधिष्ठिरका संवाद  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  7.111.23-24h 
मां चापि मन्यते युद्धे भारद्वाजस्य धीमत:।
सोऽहं सम्भावनां चैतामाचार्यवचनं च तत्॥ २३॥
पृष्ठतो नोत्सहे कर्तुं त्वां वा त्यक्तुं महीपते।
 
 
अनुवाद
अर्जुन भी मुझे बुद्धिमान द्रोणाचार्य का सामना करने के लिए योग्य योद्धा मानते हैं। हे राजन! मैं न तो अपने गुरु की इस संभावना को, न उनकी आज्ञा को टाल सकता हूँ और न ही आपको त्याग सकता हूँ॥23 1/2॥
 
‘Arjuna also considers me a capable warrior to face the wise Dronacharya. O King! I can neither push back this possibility of my teacher nor his order nor can I abandon you.॥ 23 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)