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mahabharat 7.110.d1-d2: जब सत्पुरुषों का समूह एकत्रित होता है, तो वहाँ उपस्थित सभी लोग आपके गुणों की प्रशंसा करते हैं और उन्हें संसार में सबसे असाधारण बताते हैं। वे कहते हैं कि सात्यकि देवताओं, दानवों, गंधर्वों, किन्नरों और बड़े-बड़े सर्पों सहित अनेक शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। वे अकेले ही समस्त संसार से युद्ध कर सकते हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक d1-d2
 
 
श्लोक  7.110.d1-d2 
(सदेवासुरगन्धर्वान् सकिन्नरमहोरगान्।
योधयेत् स जगत‍् सर्वं विजयेत रिपून् बहून्॥
इति ब्रुवन्ति लोकेषु जनास्तव गुणान् सदा।
समागमेषु जल्पन्ति पृथगेव च सर्वदा॥)
 
 
अनुवाद
जब सत्पुरुषों का समूह एकत्रित होता है, तो वहाँ उपस्थित सभी लोग आपके गुणों की प्रशंसा करते हैं और उन्हें संसार में सबसे असाधारण बताते हैं। वे कहते हैं कि सात्यकि देवताओं, दानवों, गंधर्वों, किन्नरों और बड़े-बड़े सर्पों सहित अनेक शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। वे अकेले ही समस्त संसार से युद्ध कर सकते हैं।
 
When a society of good men gathers, all the people present there always praise your qualities as the most extraordinary in the world. They say that Satyaki can conquer many enemies including gods, demons, Gandharvas, Kinnars and big serpents. He can fight the entire world single-handedly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)