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mahabharat 7.110.99-100h: तात! शिनिप्रवर! धर्मात्मा अर्जुन ही आपके गुरु हैं और भगवान श्रीकृष्ण आपके तथा बुद्धिमान अर्जुन के भी गुरु हैं। 99 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 99-100h
 
 
श्लोक  7.110.99-100h 
तवार्जुनो गुरुस्तात धर्मात्मा शिनिपुङ्गव॥ ९९॥
वासुदेवो गुरुश्चापि तव पार्थस्य धीमत:।
 
 
अनुवाद
तात! शिनिप्रवर! धर्मात्मा अर्जुन ही आपके गुरु हैं और भगवान श्रीकृष्ण आपके तथा बुद्धिमान अर्जुन के भी गुरु हैं। 99 1/2॥
 
Tat! Shinipravar! The righteous Arjun is your guru and Lord Krishna is the guru of you and the wise Arjun too. 99 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)