Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.110.98-99h: शैनय्या! दाशार्ह वंश के वीर पुरुष युद्धभूमि में प्राण बचाने का प्रयत्न नहीं करते। युद्ध से विमुख होना, युद्धभूमि में डटे न रहना तथा युद्धभूमि से भाग जाना कायरों और नीच पुरुषों का मार्ग है। दाशार्ह वंश के वीर पुरुष इससे दूर रहें।॥98 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न हि शैनेय दाशार्हा रणे रक्षन्ति जीवितम्।
अयुद्धमनवस्थानं संग्रामे च पलायनम्॥ ९८॥
भीरूणामसतां मार्गो नैष दाशार्हसेवित:।
अनुवाद
शैनय्या! दाशार्ह वंश के वीर पुरुष युद्धभूमि में प्राण बचाने का प्रयत्न नहीं करते। युद्ध से विमुख होना, युद्धभूमि में डटे न रहना तथा युद्धभूमि से भाग जाना कायरों और नीच पुरुषों का मार्ग है। दाशार्ह वंश के वीर पुरुष इससे दूर रहें।॥98 1/2॥
Shainayya! The brave men of the Dasharha clan do not try to save their lives in the battlefield. To turn away from the war, not to stand firm on the battlefield and to run away from the battlefield is the path of cowards and mean men. The brave men of the Dasharha clan stay away from this.॥98 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥