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mahabharat 7.110.93-94h: हे व्याघ्र! तुम अस्त्र-शस्त्र विद्या में भगवान श्रीकृष्ण के समान, बल में बलरामजी के समान और पराक्रम में धनंजय के समान हो। 93 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 93-94h
 
 
श्लोक  7.110.93-94h 
अस्त्रे नारायणसम: संकर्षणसमो बले॥ ९३॥
वीरतायां नरव्याघ्र धनंजयसमो ह्यसि।
 
 
अनुवाद
हे व्याघ्र! तुम अस्त्र-शस्त्र विद्या में भगवान श्रीकृष्ण के समान, बल में बलरामजी के समान और पराक्रम में धनंजय के समान हो। 93 1/2॥
 
Tiger! You are equal to Lord Krishna in knowledge of weapons, equal to Balramji in strength and equal to Dhananjay in bravery. 93 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)