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mahabharat 7.110.9: तत्पश्चात् महाधनुर्धर द्रोण पुनः क्रोधित हो गये और उन्होंने मुड़े हुए सिरे वाले बाण से सात्यकि को गंभीर रूप से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.110.9 
तत: क्रुद्धो महेष्वासो भूय एव महाबल:।
सात्वतं पीडयामास शरेणानतपर्वणा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाधनुर्धर द्रोण पुनः क्रोधित हो गये और उन्होंने मुड़े हुए सिरे वाले बाण से सात्यकि को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
 
Thereafter Drona, the mighty archer, again became enraged and wounded Satyaki deeply with an arrow having a bent tip.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)