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mahabharat 7.110.79: व्याघ्र! अर्जुन के आगे सिंधुराज की सेना है और पीछे द्रोणाचार्य की सेना है। उनकी संख्या इतनी अधिक है कि वे इंद्र को भी व्यथित कर सकती हैं। 79॥   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  7.110.79 
पुरस्तात् सैन्धवानीकं द्रोणानीकं च पृष्ठत:।
बहुत्वाद्धि नरव्याघ्र देवेन्द्रमपि पीडयेत्॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
व्याघ्र! अर्जुन के आगे सिंधुराज की सेना है और पीछे द्रोणाचार्य की सेना है। उनकी संख्या इतनी अधिक है कि वे इंद्र को भी व्यथित कर सकती हैं। 79॥
 
Tiger! In front of Arjun is Sindhuraj's army and behind is Dronacharya's army. Its numbers are so high that it can torment even Lord Indra. 79॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)