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mahabharat 7.110.78: हाथियों की चिंघाड़ सुनो। हज़ारों पैदल सैनिकों और घुड़सवारों की दौड़ती और धरती को हिलाती आवाज़ सुनो।   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  7.110.78 
नागानां शृणु शब्दं च पत्तीनां च सहस्रश:।
सादिनां द्रवतां चैव शृणु कम्पयतां महीम्॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
हाथियों की चिंघाड़ सुनो। हज़ारों पैदल सैनिकों और घुड़सवारों की दौड़ती और धरती को हिलाती आवाज़ सुनो।
 
Listen to the trumpeting of elephants. Listen to the sound of thousands of infantry and horsemen running and shaking the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)