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mahabharat 7.110.77: सुनो! नगाड़ों की ध्वनि सुनाई दे रही है, शंख जोर-जोर से बज रहे हैं, योद्धाओं की गर्जना और रथों के पहियों की घरघराहट सुनाई दे रही है।   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  7.110.77 
शृणु दुन्दुभिनिर्घोषं शङ्खशब्दांश्च पुष्कलान्।
सिंहनादरवांश्चैव रथनेमिस्वनांस्तथा॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
सुनो! नगाड़ों की ध्वनि सुनाई दे रही है, शंख जोर-जोर से बज रहे हैं, योद्धाओं की गर्जना और रथों के पहियों की घरघराहट सुनाई दे रही है।
 
Listen! the sound of drums is being heard, the conches are being blown loudly, the roars of the warriors and the whirring of the wheels of chariots can be heard. 77.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)