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mahabharat 7.110.75: इस सेना को नष्ट किये बिना जयद्रथ को पराजित करना असंभव है। इन सभी सैनिकों ने सिंधुराज के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है।   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  7.110.75 
नैतद् बलमसंवार्य शक्यो जेतुं जयद्रथ:।
एते हि सैन्धवस्यार्थे सर्वे संत्यक्तजीविता:॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
इस सेना को नष्ट किये बिना जयद्रथ को पराजित करना असंभव है। इन सभी सैनिकों ने सिंधुराज के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है।
 
It is impossible to defeat Jayadratha without destroying this army. All these soldiers have sacrificed their lives for Sindhuraj. 75.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)