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mahabharat 7.110.73: सारी सेना दौड़ते हुए रथों, सैनिकों और घोड़ों द्वारा उड़ाई गई धूल से ढकी हुई, वृत्ताकार घूम रही है। 73.   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  7.110.73 
रथैर्विपरिधावद्भिर्मनुष्यैश्च हयैश्च ह।
सैन्यं रज:समुद्‍धूतमेतत् सम्परिवर्तते॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
सारी सेना दौड़ते हुए रथों, सैनिकों और घोड़ों द्वारा उड़ाई गई धूल से ढकी हुई, वृत्ताकार घूम रही है। 73.
 
The whole army is moving in circles, covered with the dust thrown up by the running chariots, men and horses. 73.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)