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mahabharat 7.110.68: द्रोणाचार्य द्वारा दिए गए कवच से सुरक्षित दुर्योधन अचानक अर्जुन का सामना करने के लिए आगे बढ़ा। कई कौरव योद्धा पहले ही उसके पीछे आ चुके थे।   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.110.68 
सुयोधनो हि सहसा गतो द्रोणेन दंशित:।
पूर्वमेवानुयातास्ते कौरवाणां महारथा:॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य द्वारा दिए गए कवच से सुरक्षित दुर्योधन अचानक अर्जुन का सामना करने के लिए आगे बढ़ा। कई कौरव योद्धा पहले ही उसके पीछे आ चुके थे।
 
Protected by the armour given to him by Dronacharya, Duryodhana suddenly went to face Arjuna. Many Kaurava warriors had already followed him. 68
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)