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mahabharat 7.110.63: वार्ष्णेय! अर्जुन, मेरा, भीमसेन का तथा दोनों माद्रीपुत्रों का आपके विषय में जो संकल्प है, उसे आप व्यर्थ न जाने दें॥63॥   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.110.63 
तस्य त्वमेवं संकल्पं न वृथा कर्तुमर्हसि।
धनंजयस्य वार्ष्णेय मम भीमस्य चोभयो:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
वार्ष्णेय! अर्जुन, मेरा, भीमसेन का तथा दोनों माद्रीपुत्रों का आपके विषय में जो संकल्प है, उसे आप व्यर्थ न जाने दें॥63॥
 
Varshneya! You should not waste the resolve of Arjuna, me, Bhimasena and both the sons of Madri regarding you. ॥ 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)