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mahabharat 7.110.62: तात! इस प्रकार द्वैतवन में महापुरुषों की सभा में आपके वास्तविक गुणों का वर्णन करते हुए अर्जुन ने मुझसे परोक्ष रूप से उपर्युक्त बातें कहीं॥62॥   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  7.110.62 
इति द्वैतवने तात मामुवाच धनंजय:।
परोक्षे त्वद्‍गुणांस्तथ्यान् कथयन्नार्यसंसदि॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
तात! इस प्रकार द्वैतवन में महापुरुषों की सभा में आपके वास्तविक गुणों का वर्णन करते हुए अर्जुन ने मुझसे परोक्ष रूप से उपर्युक्त बातें कहीं॥62॥
 
Tat! Thus, while describing your true qualities in the assembly of great men in Dwaitavan, Arjuna said the above mentioned things to me indirectly. 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)