Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.110.6: हे राजन! द्रोणाचार्य के बाण शत्रुओं का मांस खाने के लिए थे। वे सात्यकि के सुदृढ़ कवच को फाड़कर फुंफकारते हुए सर्पों के समान पृथ्वी में जा धंसे। | mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजन! द्रोणाचार्य के बाण शत्रुओं का मांस खाने के लिए थे। वे सात्यकि के सुदृढ़ कवच को फाड़कर फुंफकारते हुए सर्पों के समान पृथ्वी में जा धंसे।
O King! Dronacharya's arrows were meant to eat the flesh of enemies. They tore apart Satyaki's strong armour and went into the earth like hissing snakes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥