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mahabharat 7.110.59-61: राजेन्द्र! महाराज! यदि भगवान श्रीकृष्ण, बलराम, अनिरुद्ध, महारथी प्रद्युम्न, गद, सारण या वृष्णिवंशी पुरुष साम्ब कवच धारण करके युद्ध के उत्तम बिन्दु पर हमारी सहायता के लिए तत्पर हों, तो मैं सत्यरूपी सिंह महाबली शिनिपुत्र सात्यकि को अपनी सहायता के लिए अवश्य नियुक्त करूँगा; क्योंकि मेरी दृष्टि में सात्यकि के समान दूसरा कोई नहीं है॥59-61॥   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 59-61
 
 
श्लोक  7.110.59-61 
अस्मदर्थं च राजेन्द्र संनह्येद् यदि केशव:।
रामो वाप्यनिरुद्धो वा प्रद्युम्नो वा महारथ:॥ ५९॥
गदो वा सारणो वापि साम्बो वा सह वृष्णिभि:।
सहायार्थं महाराज संग्रामोत्तममूर्धनि॥ ६०॥
तथाप्यहं नरव्याघ्रं शैनेयं सत्यविक्रमम्।
साहाय्ये विनियोक्ष्यामि नास्ति मेऽन्यो हि तत्सम:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! महाराज! यदि भगवान श्रीकृष्ण, बलराम, अनिरुद्ध, महारथी प्रद्युम्न, गद, सारण या वृष्णिवंशी पुरुष साम्ब कवच धारण करके युद्ध के उत्तम बिन्दु पर हमारी सहायता के लिए तत्पर हों, तो मैं सत्यरूपी सिंह महाबली शिनिपुत्र सात्यकि को अपनी सहायता के लिए अवश्य नियुक्त करूँगा; क्योंकि मेरी दृष्टि में सात्यकि के समान दूसरा कोई नहीं है॥59-61॥
 
Rajendra! Maharaj! If Lord Shri Krishna, Balram, Aniruddha, the great charioteer Pradyumna, Gad, Saran or the Vrishni clansmen are ready to help us at the best point of the war, wearing the Samba armor, then I, the lion of truth, will definitely appoint Satyaki, the son of Shini, who is mighty in power, to help me; Because in my eyes no one else is equal to Satyaki. 59-61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)