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mahabharat 7.110.58: सात्यकि मेरे शिष्य और मित्र हैं। मैं उन्हें प्रिय हूँ और वे मुझे प्रिय हैं। युयुधान मेरा सहायक बनेगा और मेरे विरोधियों, कौरवों का नाश करेगा।   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  7.110.58 
शिष्यो मम सखा चैव प्रियोऽस्याहं प्रियश्च मे।
युयुधान: सहायो मे प्रमथिष्यति कौरवान्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
सात्यकि मेरे शिष्य और मित्र हैं। मैं उन्हें प्रिय हूँ और वे मुझे प्रिय हैं। युयुधान मेरा सहायक बनेगा और मेरे विरोधियों, कौरवों का नाश करेगा।
 
‘Satyaki is my disciple and friend. I am dear to him and he is dear to me. Yuyudhaana will become my helper and destroy my opponents, the Kauravas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)