Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.110.56: वे कहते थे - 'सात्यकि के हाथों में बड़ी फुर्ती है । वह विचित्र प्रकार से युद्ध करता है और शीघ्रता से पराक्रम दिखाता है । विद्वान् और समस्त अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञाता योद्धा सात्यकि युद्धभूमि में कभी निराश नहीं होता ॥56॥ | mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लघुहस्तश्चित्रयोधी तथा लघुपराक्रम:।
प्राज्ञ: सर्वास्त्रविच्छूरो मुह्यते न च संयुगे॥ ५६॥
अनुवाद
वे कहते थे - 'सात्यकि के हाथों में बड़ी फुर्ती है । वह विचित्र प्रकार से युद्ध करता है और शीघ्रता से पराक्रम दिखाता है । विद्वान् और समस्त अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञाता योद्धा सात्यकि युद्धभूमि में कभी निराश नहीं होता ॥56॥
He used to say – 'Satyaki has great agility in his hands. He fights in a strange manner and displays bravery quickly. Satyaki, a scholar and a warrior who knows all weapons, never gets disillusioned on the battlefield. 56॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥