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mahabharat 7.110.55: पाण्डुपुत्र अर्जुन ने बार-बार आपके गुणों का वर्णन किया है, आपके सैकड़ों कार्यों की प्रशंसा की है और मेरे हर्ष को बढ़ाया है ॥55॥   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  7.110.55 
श्लाघन्नेव हि कर्माणि शतशस्तव पाण्डव:।
मम संजनयन् हर्षं पुन: पुनरकीर्तयत्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुपुत्र अर्जुन ने बार-बार आपके गुणों का वर्णन किया है, आपके सैकड़ों कार्यों की प्रशंसा की है और मेरे हर्ष को बढ़ाया है ॥55॥
 
Arjuna, son of Pandu, has repeatedly described your qualities, praising your hundreds of deeds and increasing my joy. ॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)