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mahabharat 7.110.53: युद्ध में यश प्राप्ति की इच्छा से वीर कर्म करने वाले वीर पुरुष की सहायता केवल वीर पुरुष ही कर सकता है, अन्य कोई निम्न कोटि का पुरुष उसकी सहायता नहीं कर सकता ॥53॥   |   mahabharat अध्याय 7.110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 110: द्रोणाचार्य और सात्यकिका युद्ध तथा युधिष्ठिरका सात्यकिकी प्रशंसा करते हुए उसे अर्जुनकी सहायताके लिये कौरव-सेनामें प्रवेश करनेका आदेश  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  7.110.53 
विक्रान्तस्य च वीरस्य युद्धे प्रार्थयतो यश:।
शूर एव सहाय: स्यान्नेतर: प्राकृतो जन:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में यश प्राप्ति की इच्छा से वीर कर्म करने वाले वीर पुरुष की सहायता केवल वीर पुरुष ही कर सकता है, अन्य कोई निम्न कोटि का पुरुष उसकी सहायता नहीं कर सकता ॥53॥
 
Only a valiant man can help a brave man who is performing heroic deeds with the desire to gain fame in the war. No other man of low rank can help him. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)